धार्मिक स्थल

हरिद्वार के धार्मिक स्थल

हर की पैड़ी

हर की पैड़ी

इस पवित्र्ा घाट का निर्माण राजा विक्रमादित्य ने अपने भाई भृर्तहरि की याद में किया था। यह माना जाता है कि भृर्तहरि हरिद्वार आए थे ताकि गंगा कि तट पर ध्यान लगाया जा सके। जब वह मृत्यु को प्राप्त हुए तब उनके भाई ने उनके नाम पर एक घाट का निर्माण किया, जिसे बाद में हर की पौड़ी के रूप में जाना जाने लगा। इस पवित्र्ा घाट को ब्रहमकुंड भी कहा जाता है। इस स्थान पर प्रतिदिन सांय गंगा आरती का आयोजन किया जाता है जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु एवं पर्यटक भाग लेते हैं एवं गंगा नदी में दीपकों के प्रतिबिम्ब के मनोहारी दृश्यों को देखकर मन्त्र्ामुग्ध होते हैं।

चंडी देवी मंदिर

चंडी देवी मंदिर

गंगा नदी के दूसरे किनारे पर नील पर्वत के उपर चंडी देवी का मंदिर वर्ष 1929 में कश्मीर के राजा द्वारा बनाया गया था। यह चंडी घाट से लगभग 3 किलोमीटर दूर है। पौराणिक कथा यह है कि एक स्थानीय दानव राजा शुंभ निशुंभ देवी चंडी के हाथों द्वारा मारा गया था, जिसके बाद यह चंडी देवी के नाम से विख्यात हुआ। यह माना जाता है कि मंदिर में मुख्य मूर्ति 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित की गई थीं। रोपवे या पैरांे के माध्यम से यहां पहुंचा जा सकता है।

मनसा देवी मंदिर

मनसा देवी मंदिर

मनसा देवी का मंदिर बिल्वा पर्वत के शीर्ष पर स्थित है। यहां देवी की एक प्रतिमा में तीन मुख और पांच शस्त्र्ा है जबकि अन्य प्रतिमा में आठ हथियार हैं। इस जगह से शहर का संुदर दृश्य देखा जा सकता है। मंदिर को रोपवे या पैरों के माध्यम से पहुंचा जा सकता है।

दक्ष महादेव मंदिर

दक्ष महादेव मंदिर

दक्ष महादेव का मंदिर कनखल में स्थित है। इस स्थान के बारे में पौराणिक कथा यह है कि सती(भगवान शिव की पहली पत्नी) के पिता राजा दक्ष प्रजापति ने इस स्थान पर यज्ञ किया परन्तु यज्ञ में दक्ष प्रजापति ने भगवान शिव को आमंत्र्ाित नहीं किया और इस पर सती ने अपमानित महसूस किया। इसलिए उसने यज्ञ कंुड में खुद को भस्म कर दिया। इस घटना ने महादेव के शिष्यों और अनुयायियों को उग्र कर दिया एवं फिर उन्होने राजा दक्ष को मार डाला, लेकिन बाद में भगवान महादेव ने पुनः उसे जीवन प्रदान किया।

भीमगोडा कुंड

भीमगोडा कुंड

यह टैंक हरकी पैड़ी से लगभग 1 किमी की दूरी पर है| ऐसा कहा जाता है कि पांडव हरिद्वार के माध्यम से हिमालय जा रहे थे, भीम ने अपने घुटने के झटके से इस टैंक को बनाया।

सप्तऋषि आश्रम

सप्तऋषि आश्रम

ऐसा कहा जाता है कि गंगा ने इस स्थान पर सात धाराओं में खुद को विभाजित किया है ताकि सप्त (सात) ऋषियों की पूजा में कोई व्यवधान न हो|

माया देवी मंदिर

माया देवी मंदिर

यह हरिद्वार की अधिष्ठात्री देवी, माया देवी का एक प्राचीन मंदिर है, जिसे सिद्धपीठों में से एक कहा जाता है। कहा जाता है कि वह जगह जहां देवी सती का दिल और नाभि गिर गई थी

अन्य आकर्षण

हरिद्वार में कई अन्य खूबसूरत आश्रम / मंदिर हैं जैसे शांतीकुंज, जयराम आश्रम, भूमा निकेतन, भारत माता मंदिर, वैष्णव देवी मंदिर, राधा कृष्ण मंदिर, श्रवण नाथ मठ, पवन धरम, दुधाधरी मंदिर, बिल्केश्वर महादेव मंदिर, शाही गुरुद्वारा, परमार्थ आश्रम, प्रेम नगर आश्रम, माँ आनंदमई आश्रम आदि। यह सभी जगहें देखने योग्य है।